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धर्म / अध्यात्म
02 May, 2026

नेपाल के बनेपा में चण्डेश्वरी जात्रा की धूम, श्रद्धालुओं की भारी भीड़

बनेपा में चण्डेश्वरी जात्रा के दौरान देवी की पूजा, रथ यात्रा, और विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों से पूरे क्षेत्र में धूम मच गई है।

काठमांडू, 02 मई।

नेपाल के काभ्रे जिले के बनेपा में इन दिनों चण्डेश्वरी जात्रा उत्सव की धूम मची हुई है। यह पारंपरिक जात्रा हर साल बड़े धूमधाम से मनाई जाती है और स्थानीय लोग इस उत्सव का आयोजन अपने पूरे जोश के साथ करते हैं। प्रत्येक वर्ष चण्डी पूर्णिमा से तीन दिनों तक यह उत्सव बना रहा है, जो बनेपा के सात गांवों में मनाया जाता है।

जात्रा के पहले दिन लोग ‘मत पूजा’ और चिराग यात्रा निकालते हैं, जिसमें पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ लोग अपने घरों से चिराग लेकर बनेपा के लायकू में एकत्रित होते हैं। यहां से चिराग लेकर वे जलेश्वर महादेव मंदिर तक जाते हैं और वहां विसर्जन करते हैं। इसके बाद, अगले तीन दिनों तक यह उत्सव विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ मनाया जाता है, जिसमें नेवार समुदाय के घरों में भोज का आयोजन किया जाता है।

इसके अलावा, इस दौरान विशेष सफाई और शुद्धिकरण की प्रक्रिया भी की जाती है। परंपरा के अनुसार, काठमांडू के हनुमान ढोका से लाए गए तलवार की पूजा भी की जाती है। बुजुर्ग लोग भजन गाकर इस अवसर पर शहर की गलियों और सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ के साथ आनंदित होते हैं।

जात्रा के दिन बनेपा के तीनधारा में एक बिना पहिए वाला खट (रथ) तैयार किया जाता है, जिस पर चण्डेश्वरी देवी की पूजा के बाद उसे चण्डेश्वरी मंदिर तक ले जाया जाता है। इस रथ को गाजे-बाजे के साथ युवा कंधों पर उठाकर मंदिर तक पहुंचाते हैं।

दूसरे दिन देवी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना के बाद रथ को पुनः बकुटोल क्षेत्र में लाया जाता है, जहां देवी चण्डेश्वरी ने चण्डासुर का वध किया था। वहां से खट को प्राचीन लायकू दरबार में लाया जाता है, और अंत में देवी की मूर्ति को पुनः चण्डेश्वरी मंदिर में स्थापित किया जाता है।

यह जात्रा शक्ति की देवी चण्डेश्वरी की पूजा का प्रतीक मानी जाती है और दूर-दूर से श्रद्धालु इसमें शामिल होने के लिए आते हैं। स्थानीय मानन्धर, भोछिभोया, राजवाहक और अन्य नेवार समुदायों की भागीदारी इसे और भी खास बनाती है।

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