कोलकाता 29 अप्रैल।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान के बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, लापरवाही या हिंसा के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर कार्य कर रहा है।
उन्होंने बताया कि अभी तक लगभग 25 से 30 शिकायतें प्राप्त होने की बात सामने आई है, हालांकि वास्तविक संख्या की पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी। सभी शिकायतों को रिकॉर्ड किया जा रहा है और सेक्टर अधिकारी तथा पीठासीन अधिकारी से फोन पर सत्यापन के बाद एआरओ और डीईओ की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति बूथ पर ईवीएम या वीवीपैट मशीन पर टेप लगाकर मतदान प्रक्रिया बाधित करने का प्रयास करता है तो उसे गंभीर अपराध माना जाएगा।
उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत बूथ कब्जा और चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप अपराध की श्रेणी में आता है। जहां भी हस्तक्षेप की पुष्टि होगी, वहां तत्काल रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मनोज अग्रवाल के अनुसार सबसे अधिक शिकायतें दक्षिण 24 परगना जिले से प्राप्त हुई हैं। प्रत्येक शिकायत की निगरानी की जा रही है और जिन बूथों पर किसी प्रकार की छेड़छाड़ की बात सामने आई है, वहां वेबकास्टिंग फुटेज, ऑब्जर्वर रिपोर्ट और पीठासीन अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर जांच की जाएगी। यदि बड़ी संख्या में बूथ प्रभावित पाए जाते हैं तो पूरी विधानसभा क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मतदान केंद्र से 100 मीटर के दायरे में सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय सुरक्षा बलों की होती है। यदि मॉक पोल के दौरान मशीनें सुरक्षित थीं और मतदान के समय उन पर टेप पाया गया, तो यह स्पष्ट संकेत है कि मतदान के दौरान हस्तक्षेप हुआ है। ऐसे मामलों में वेबकास्टिंग के माध्यम से व्यक्तियों की पहचान कर पूछताछ और कार्रवाई की जाएगी।
उम्मीदवारों पर हमले की शिकायतों पर उन्होंने कहा कि जहां से भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, वहां पुलिस और केंद्रीय बलों ने तुरंत पहुंचकर स्थिति नियंत्रित की है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस प्रकार की घटनाओं को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
केंद्रीय सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि आवश्यक होने पर भीड़ नियंत्रण के लिए लाठीचार्ज भी किया जा सकता है। यदि प्रतिबंधात्मक आदेश लागू क्षेत्रों में भीड़ हिंसक होती है तो बलों को स्थिति नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अब तक हुआ मतदान वैध रहेगा और शांति व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
















