जोधपुर 29 अप्रैल।
यौन उत्पीड़न मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को एक बार फिर राहत मिली है। राजस्थान उच्च न्यायालय ने मेडिकल आधार पर उनकी अंतरिम जमानत 25 मई तक या अपील पर अंतिम निर्णय आने तक बढ़ाने का आदेश दिया है।
आसाराम की ओर से दायर याचिका में बढ़ती उम्र, गंभीर बीमारियों और लंबे समय से चल रहे उपचार का हवाला देते हुए जमानत अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी। यह याचिका कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा की खंडपीठ के समक्ष रखी गई।
उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत और अधिवक्ता यशपाल सिंह राजपुरोहित ने पक्ष रखा। अदालत को बताया गया कि आसाराम वर्ष 2013 से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं और वर्ष 2018 में दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद पूर्व में भी अंतरिम जमानत कई बार बढ़ाई जा चुकी है।
वर्तमान में वे 29 अक्टूबर 2025 से अंतरिम जमानत पर बाहर रहकर उपचार करवा रहे हैं। वकीलों ने दलील दी कि जमानत नहीं बढ़ाने पर उपचार अधूरा रह जाएगा और उन्हें पुनः जेल जाना पड़ेगा। साथ ही यह भी बताया गया कि अपील पर सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने कहा कि जेल प्रशासन की ओर से समय-समय पर उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है और उपचार में कोई कमी नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अंतरिम जमानत 25 मई तक बढ़ाने का आदेश दिया। साथ ही उच्चतम न्यायालय की पूर्व शर्तों को लगभग यथावत रखा गया, जबकि निगरानी से जुड़ी कुछ शर्तों में आंशिक राहत दी गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत अवधि केवल उपचार तक सीमित रहेगी और उन्हें किसी भी धार्मिक सभा, भीड़ एकत्र करने या विदेश यात्रा की अनुमति नहीं होगी।
इससे पहले भी अक्टूबर 2025 में उन्हें अंतरिम जमानत दी गई थी, जिसके बाद 30 अगस्त 2025 को वे सरेंडर कर चुके थे। वर्ष 2013 में जोधपुर स्थित आश्रम में नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज हुआ था और 2018 में विशेष पॉक्सो अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
















