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वाइल्ड लाइफ
21 Mar, 2026

ज़ेब्रा की धारियों का रहस्य: प्रकृति का अनोखा विज्ञान

ज़ेब्रा की काली-सफेद धारियाँ केवल सुंदरता नहीं, बल्कि कीटों से बचाव, तापमान नियंत्रण और शिकारियों से सुरक्षा जैसे कई वैज्ञानिक कारणों का परिणाम हैं।

21, मार्च

ज़ेब्रा को अपनी धारियाँ कैसे मिलीं, यह विषय कई वर्षों से वैज्ञानिकों को आकर्षित करता रहा है। हालांकि इसका कोई एक आसान कारण नहीं है, लेकिन शोध इसके पीछे स्पष्ट और प्रमाण आधारित जानकारी देता है। ज़ेब्रा अफ्रीका में पाए जाते हैं और घोड़े के परिवार से संबंधित होते हैं। उनके शरीर पर काले और सफेद रंग की धारियाँ होती हैं, जो हर ज़ेब्रा में अलग होती हैं, ठीक इंसानों के उंगलियों के निशान की तरह।वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ये धारियाँ बिल्कुल भी अचानक नहीं बनतीं। ये ज़ेब्रा के गर्भ में विकसित होने के दौरान बनती हैं, जहाँ कुछ खास कोशिकाएँ रंग बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करती हैं। काले हिस्सों में मेलानिन नामक रंगद्रव्य होता है, जबकि सफेद हिस्सों में यह नहीं होता। यह पूरा पैटर्न आनुवंशिक निर्देशों के अनुसार बनता है, जो तय करते हैं कि शरीर के किस हिस्से में रंग कैसे बनेगा। इसी प्रक्रिया के कारण जन्म के समय ज़ेब्रा की खास धारियाँ दिखाई देती हैं।

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{Source-https://i.pinimg.com/1200x/d9/af/0e/d9af0eb7a988bc45860125c45e647d57.jpg}

ज़ेब्रा में धारियाँ विकसित होने का एक मुख्य कारण कीटों से बचाव माना जाता है। शोध में पाया गया है कि त्सेत्से मक्खी और घोड़े पर बैठने वाली मक्खियाँ धारियों वाली सतह पर कम बैठती हैं। ये कीट कई खतरनाक बीमारियाँ फैलाते हैं, इसलिए धारियाँ ज़ेब्रा को इनसे बचाकर उसे जीवित रहने में मदद करती हैं। धारियों वाले और बिना धारियों वाले जानवरों पर किए गए प्रयोग भी इस बात का समर्थन करते हैं।एक और कारण तापमान नियंत्रण से जुड़ा हुआ है। काले और सफेद रंग अलग-अलग मात्रा में गर्मी को सोखते हैं, जिससे ज़ेब्रा के शरीर के आसपास हल्की हवा का प्रवाह बन सकता है। इससे उसे गर्म जलवायु में ठंडा रहने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस पर अभी और अध्ययन चल रहे हैं, लेकिन कुछ प्रमाण इस विचार का समर्थन करते हैं।धारियाँ शिकारियों को भ्रमित करने में भी मदद कर सकती हैं। जब ज़ेब्रा झुंड में दौड़ते हैं, तो उनकी धारियाँ ऐसा दृश्य बनाती हैं जिससे शेर जैसे शिकारी किसी एक ज़ेब्रा पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। इस प्रभाव को “गतिशील भ्रम” कहा जाता है, जो हमले के समय ज़ेब्रा को बच निकलने का मौका देता है।कुल मिलाकर, ज़ेब्रा की धारियाँ विकास की प्रक्रिया का परिणाम हैं, जो हजारों वर्षों में पर्यावरण के प्रभाव से बनी हैं। यह कोई साधारण कहानी नहीं है, बल्कि जीव के विकास और उसके बचाव से जुड़े कई कारणों का मिश्रण है।

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