नई दिल्ली, 19 मई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भारत और नॉर्वे के बीच कई द्विपक्षीय समझौते किए गए हैं।
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए ओस्लो में नॉर्वे के प्रमुख अनुसंधान, शैक्षणिक और औद्योगिक संस्थानों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर सीएसआईआर के महानिदेशक और डीएसआईआर के सचिव डॉ. एन. कलाइसेल्वी ने नॉर्वे के सहयोगी संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ समझौतों पर दस्तखत किए। इन समझौतों का उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्रों में भारत-नॉर्वे संबंधों को मजबूत करना, संस्थागत साझेदारी, स्टार्टअप और उद्योग सहभागिता, शैक्षणिक सहयोग तथा सतत विकास पहलों को बढ़ावा देना है।
सीएसआईआर और नॉर्वे की अनुसंधान परिषद (आरसीएन) के बीच समझौता ज्ञापन अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार और क्षमता निर्माण में सहयोग को बढ़ावा देगा। इसमें जलवायु, स्वच्छ ऊर्जा, महासागर और स्वास्थ्य जैसे वैश्विक मुद्दों और सतत विकास लक्ष्यों के लिए संयुक्त कार्यशालाएं, सहयोगात्मक अनुसंधान, परियोजनाएं और वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान से जुड़ी यात्राओं का प्रावधान शामिल है।
समझौते में जैव-आधारित प्रक्रियाओं, नवाचार केंद्रों, समुद्री ऊर्जा, कार्बन कैप्चर और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रम शामिल हैं। इस परियोजना के लिए सीएसआईआर लगभग 341 लाख रुपये का वित्तीय सहयोग देगा, जिसमें संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, भूभौतिकीय सर्वेक्षण, डेटा विश्लेषण, तकनीकी परामर्श और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।
ये समझौते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत-नॉर्वे सहयोग का मील का पत्थर हैं और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी, अनुसंधान और नवाचार-आधारित सतत विकास को मजबूत करेंगे।
















