काबुल, 09 जून।
अफगानिस्तान में लगभग 38 लाख लड़कियों के स्कूल से बाहर रहने की स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर चिंता जताई है, जिससे देश के एक ‘खोई हुई पीढ़ी’ की ओर बढ़ने की आशंका गहरा गई है। यह स्थिति तालिबान द्वारा लगाए गए शैक्षणिक प्रतिबंधों के कारण बनी हुई है।
अफगान मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) की कार्यवाहक प्रमुख जॉर्जेट गैगनन ने बताया कि 7 से 18 वर्ष की लगभग 38 लाख लड़कियां शिक्षा से वंचित हैं, जिनमें 26 लाख से अधिक किशोरियां शामिल हैं जिन्हें माध्यमिक शिक्षा की अनुमति नहीं दी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि हर वर्ष लगभग 2.5 लाख लड़कियां शिक्षा प्रणाली से बाहर हो रही हैं, जिससे देश के सामाजिक और आर्थिक विकास पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने चेतावनी दी कि अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था में कुछ स्थिरता के संकेत जरूर हैं, लेकिन विकास की गति बेहद धीमी है और बेरोजगारी व गरीबी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। वर्ष 2026 में पड़ोसी देशों से लगभग 28 लाख अफगान नागरिकों के लौटने की संभावना है, जिससे संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2026 में करीब 2.19 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी। वहीं, मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) के अनुसार 47 लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा और लगभग 37 लाख बच्चे तीव्र कुपोषण का सामना कर रहे हैं।
2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से महिलाओं और लड़कियों पर कई प्रतिबंध लागू किए गए हैं, जिनमें छठी कक्षा के बाद शिक्षा पर रोक, विश्वविद्यालयों में प्रवेश बंद करना और रोजगार व सार्वजनिक जीवन में सीमित भागीदारी शामिल है।
हाल ही में काबुल में विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा के तीसरे चरण में भी लड़कियों को शामिल नहीं होने दिया गया, जिससे लगातार चौथे वर्ष यह स्थिति बनी हुई है। राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण के अनुसार, पहले तीन चरणों में 1.10 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए, जबकि मार्च में शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र में भी छठी कक्षा से ऊपर की लड़कियां स्कूल नहीं लौट सकीं।















