चंडीगढ़, 18 जून।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े विवादित वायरल वीडियो को लेकर राज्य की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। एक ओर अकाल तख्त के जत्थेदार ने एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर वीडियो को सही बताया है, वहीं दूसरी ओर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने दो प्रयोगशालाओं की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए दावा किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं है।
विवाद उस वीडियो को लेकर है जिसमें मुख्यमंत्री पर गुरुओं की तस्वीर के सामने शराब पीने और उसके छींटे डालने के आरोप लगाए गए हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था। मामले की जांच के बाद अकाल तख्त ने इसे सही मानते हुए मुख्यमंत्री को गुरुदोषी और पंथ विरोधी बताया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों को 29 जून को उपस्थित होने के लिए तलब किया गया है।
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने कहा कि पार्टी की ओर से दो स्वतंत्र और भारत सरकार से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से जांच करवाई गई। उनके अनुसार दोनों रिपोर्टों में 1191 अलग-अलग कोणों से शरीर की बनावट, चेहरा, कद-काठी और चाल-ढाल का विश्लेषण किया गया है।
पन्नू ने दावा किया कि जांच रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वीडियो में नजर आने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो तैयार करने के लिए किसी अभिनेता का इस्तेमाल किया गया। पार्टी इस पूरे मामले को लेकर पंजाब पुलिस के महानिदेशक से भी मुलाकात करेगी।
उन्होंने बताया कि पार्टी का प्रतिनिधिमंडल डीजीपी से मिलकर पूरे प्रकरण की जांच कराने और इसके पीछे शामिल लोगों की पहचान करने की मांग करेगा। पार्टी का कहना है कि इस कथित साजिश में शामिल लोगों की पड़ताल की जानी चाहिए, चाहे वे देश में हों या विदेश में।
वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने आरोप लगाया कि अकाली दल और सुखबीर सिंह बादल की ओर से मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि अब लोगों के सामने यह स्पष्ट हो चुका है कि फर्जी वीडियो बनाकर जनभावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
चीमा ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे वीडियो के जरिए पंजाब के लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने और प्रदेश में अशांति का माहौल बनाने का प्रयास किया गया है।















