बैतूल, 18 जून।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि किसी भी समाज की मजबूती और समृद्धि के लिए विकास तथा संस्कृति का साथ-साथ आगे बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वही विकास सार्थक माना जा सकता है, जो हमारी परंपराओं और जीवन मूल्यों से शक्ति प्राप्त करने के साथ उन्हें और अधिक सुदृढ़ भी बनाए।
बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ विषयक महासम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उपभोग आधारित तेजी से बदलती दुनिया में आध्यात्मिक जागृति का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर समानता को बढ़ावा देने वाली जीवनशैली और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज सहित किसी भी समुदाय का वास्तविक सशक्तीकरण तब संभव है, जब व्यक्ति आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जागरूकता के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करे। उनके अनुसार अध्यात्म और सेवा का समन्वय समाज में स्थायी बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
कार्यक्रम में पहुंचने पर राष्ट्रपति ने सबसे पहले पौधरोपण किया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ हुआ। बाद में दीप प्रज्ज्वलन कर महासम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन किया गया तथा उन्हें स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इसके पश्चात महासम्मेलन की औपचारिक कार्यवाही आगे बढ़ी। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल तथा संस्था के ओडिशा प्रभारी डॉ. नथमल सहित अनेक विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। माउंट आबू से आईं लीना बहन और शैलजा बहन ने भी कार्यक्रम में भागीदारी की।
अपना संबोधन पूरा करने के बाद राष्ट्रपति मुर्मु कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच ओंकारेश्वर के लिए रवाना हो गईं। वहां विश्राम के उपरांत वह शाम को ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगी और संध्या आरती में शामिल होंगी।















