नई दिल्ली, 18 जून।
भारत में ब्रिटिश हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने कहा है कि 15 जुलाई से लागू होने वाला भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) दोनों देशों के बीच “विजन 2035 रणनीतिक साझेदारी” की मजबूत आधारशिला बनेगा। उन्होंने इसे एक परिवर्तनकारी समझौता बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती प्राप्त होगी।
कैमरन ने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग के नए अवसर भी विकसित होंगे। उनका मानना है कि लंबे समय में यह समझौता दोनों देशों की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि में उल्लेखनीय योगदान देगा और साझेदारी को अधिक व्यापक तथा आत्मविश्वासपूर्ण बनाएगा।
उन्होंने कहा कि इस समझौते के जरिए रक्षा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, विज्ञान और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार होगा। उनके अनुसार कई ब्रिटिश विश्वविद्यालय भारत में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए रुचि दिखा रहे हैं, वहीं तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े क्षेत्रों में भी साझेदारी की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने कहा कि इस समझौते ने दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास को भी नई ऊंचाई दी है। उन्होंने हाल में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई सकारात्मक बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व ने इस साझेदारी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि समझौते के तहत कुछ विशेष पेशों के लिए अवसरों का विस्तार किया गया है। इसमें योग प्रशिक्षकों और संगीतकारों के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं। साथ ही व्यवसायिक यात्राओं को सुगम बनाने और सामाजिक सुरक्षा योगदान से जुड़े प्रावधानों का लाभ भी दोनों देशों के पेशेवरों को मिलेगा।
समझौते का उद्देश्य वर्ष 2030 तक भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 से 120 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से भारतीय निर्यातकों को अतिरिक्त शुल्क लाभ मिलेगा और ब्रिटेन के बाजार तक उनकी पहुंच और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगी।
सूत्रों के अनुसार सरकार आवश्यक सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और अधिसूचनाओं को अंतिम रूप देने में जुटी है, ताकि समझौते के लागू होते ही निर्यातक इसका लाभ प्राप्त कर सकें। अधिकारियों का मानना है कि यह समझौता भारतीय उद्योग और निर्यात क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर लेकर आएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस समझौते से भारतीय व्यवसायों के लिए ब्रिटेन के बड़े बाजार तक पहुंच आसान होगी और अनेक उत्पादों पर शुल्क में राहत मिलने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी।















