नई दिल्ली, 22 जून।
भारत के पेट्रोल पंप अब हरित क्रांति का दूसरा अध्याय लिख रहे हैं। केंद्र सरकार ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग यानी E20 का लक्ष्य तय किया है। कभी 5 प्रतिशत से शुरू हुआ यह सफर अब 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है और आगे 30 प्रतिशत तक जाने की तैयारी है। यह केवल पेट्रोल में अल्कोहल मिलाने की योजना नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरण संरक्षण का त्रिवेणी संगम है। अनुमान है कि 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग से देश को एक करोड़ टन कच्चे तेल की बचत होगी और लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचेगी। हालांकि हर बड़ी क्रांति की तरह इसके सामने भी कई चुनौतियां हैं। इथेनॉल मिशन भारत के लिए वरदान बनेगा या बोझ, यह उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
इथेनॉल एक जैव ईंधन है, जो गन्ना, मक्का, चावल, गेहूं और खराब अनाज से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। एक लीटर इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत कम ऊर्जा होती है, लेकिन यह अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन है और प्रदूषण कम करता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है। पहले अतिरिक्त गन्ना और चीनी उत्पादन किसानों और चीनी मिलों के लिए समस्या बन जाता था, लेकिन इथेनॉल ब्लेंडिंग ने इस अधिशेष को नई आर्थिक ताकत में बदल दिया है। अब गन्ना केवल चीनी ही नहीं, बल्कि ऊर्जा का भी स्रोत बन गया है।
इस मिशन का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिल सकता है। चीनी मिलें अब चीनी के साथ इथेनॉल भी बेच रही हैं, जिससे उनकी आय बढ़ी है और किसानों के बकाया भुगतान में कमी आई है। मक्का और चावल आधारित इथेनॉल उत्पादन से अन्य राज्यों के किसान भी इस प्रक्रिया से जुड़ रहे हैं। गोदामों में पड़े अतिरिक्त अनाज का उपयोग अब ऊर्जा उत्पादन में हो रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इथेनॉल क्षेत्र किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि का माध्यम बने।















