मुम्बई, 22 जून।
मध्य प्रदेश के मितावली स्थित 64 योगिनी मंदिर पर आधारित कलाकार एवं साधक डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की डॉक्यूमेंट्री ‘वाय 64–व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ का प्रदर्शन 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में किया गया। 15 से 21 जून तक आयोजित इस प्रतिष्ठित समारोह में फिल्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
समारोह के दौरान भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने डॉ. बीना उन्नीकृष्णन और उनकी टीम को सम्मानित किया। कार्यक्रम में फिल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न विशेषज्ञों और अतिथियों की भी उपस्थिति रही।
मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग और काली ट्रस्ट के सहयोग से तैयार की गई यह डॉक्यूमेंट्री पहली बार वैश्विक दर्शकों तक पहुंची है। यह महोत्सव दक्षिण एशिया के सबसे पुराने और प्रमुख फिल्म आयोजनों में गिना जाता है, जो विशेष रूप से वृत्तचित्र, लघु कथा और एनीमेशन फिल्मों को समर्पित है।
मध्य प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मितावली, जबलपुर और खजुराहो के योगिनी मंदिर भारतीय स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत के अद्वितीय उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि मितावली का मंदिर, जिसकी वास्तुशैली को भारत के पुराने संसद भवन की प्रेरणा माना जाता है, यूनेस्को की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है। उनके अनुसार यह डॉक्यूमेंट्री नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक धरोहर और स्त्री शक्ति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
डॉ. बीना उन्नीकृष्णन ने बताया कि करीब साढ़े बारह वर्ष पहले उन्होंने 64 योगिनियों पर चित्रांकन का कार्य शुरू किया था, जो समय के साथ एक व्यापक कलात्मक और आध्यात्मिक यात्रा में बदल गया। इस वर्ष उन्होंने 64 मूल चित्रों के साथ देश के 14 शहरों में लगभग 15 हजार किलोमीटर की यात्रा कर लोगों को योगिनी परंपरा से परिचित कराया और कला, संस्कृति तथा अध्यात्म पर संवाद स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक कलाकार की खोज नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास, समर्पण और आध्यात्मिक अनुभवों का भी विस्तार थी। उनके अनुसार यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म योगिनी मंदिरों के इतिहास और रहस्यों के साथ-साथ उस आंतरिक साहस और समर्पण की कहानी भी प्रस्तुत करती है, जो किसी आध्यात्मिक आह्वान को पूरा करने के लिए आवश्यक होता है।
संस्कृति, विरासत और अध्यात्म को एक सूत्र में पिरोती यह फिल्म दर्शकों को ऐसे अनुभव से जोड़ती है, जहां कला और इतिहास मिलकर भारतीय परंपरा की एक विशिष्ट झलक प्रस्तुत करते हैं।















