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24 Jun, 2026

ब्रिक्स देशों को डॉ. जितेंद्र सिंह का स्पेस इकोनॉमी का प्रस्ताव

ब्रिक्स देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों की बैठक में डॉ. जितेंद्र सिंह ने साझा स्पेस इकोनॉमी विकसित करने का आह्वान करते हुए अंतरिक्ष सहयोग को वैश्विक विकास और नवाचार का नया आधार बताया।

बेंगलुरु, 24 जून।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए साझा “स्पेस इकोनॉमी” विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अंतरिक्ष क्षेत्र वैश्विक आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार बनने वाला है और ब्रिक्स देशों के पास इस क्षेत्र में नई संभावनाओं को आकार देने की पर्याप्त क्षमता है।

ब्रिक्स देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का भविष्य केवल किसी एक देश के प्रयासों पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि साझेदारी, साझा नवाचार और सामूहिक दृष्टिकोण इसकी दिशा तय करेंगे। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास वैज्ञानिक विशेषज्ञता, तकनीकी दक्षता, औद्योगिक संसाधन और विशाल मानव संसाधन मौजूद हैं, जो उन्हें वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाते हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि आज अंतरिक्ष तकनीक का दायरा रॉकेट और उपग्रहों तक सीमित नहीं है। संचार, नेविगेशन, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे अनेक क्षेत्रों में इसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं, खाद्य सुरक्षा और जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने में अंतरिक्ष आधारित तकनीक की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने भारत की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि चंद्रयान-3, आदित्य एल-1 और गगनयान मिशन जैसे कार्यक्रमों ने वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में भारत की पहचान को और मजबूत किया है। उन्होंने ब्रिक्स देशों से केवल चर्चा तक सीमित न रहने और सह-विकास, सह-नवाचार तथा सह-निर्माण के मॉडल को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों से निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया के तेजी से विकसित होते अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र वाले देशों में शामिल है।

बैठक के दौरान सदस्य देशों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग की प्रगति की समीक्षा की। चर्चा में अंतरिक्ष मलबा कम करने, सुरक्षित और टिकाऊ अंतरिक्ष अभियानों को प्रोत्साहित करने, रिमोट सेंसिंग उपग्रह नेटवर्क को मजबूत बनाने और प्रस्तावित ब्रिक्स स्पेस काउंसिल की स्थापना जैसे विषय शामिल रहे। इसके अलावा आपदा प्रबंधन, पृथ्वी अवलोकन, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत इसरो द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका सहित अन्य सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में भारतीय अंतरिक्ष उद्योग और तेजी से आगे बढ़ रहे न्यू-स्पेस स्टार्टअप्स ने भी अपनी तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

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