नई दिल्ली, 29 जून।
मातृ और नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ी पहल करने जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा सोमवार को सुमन रोडमैप 2030 का शुभारंभ करेंगे। यह रणनीतिक दस्तावेज मां और बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया है।
पिछले एक दशक में भारत ने इस दिशा में प्रगति तो की है, लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी चुनौतियां बरकरार हैं। इस नई योजना में हर राज्य की स्थानीय जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग कार्ययोजनाएं बनाई गई हैं। इसमें गर्भधारण से लेकर प्रसव के बाद तक की देखभाल को एकीकृत किया गया है।
इस नई रणनीति की खासियत इसकी चार-स्तरीय निगरानी प्रणाली है। इसके जरिए गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद उच्च जोखिम वाली माताओं की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज मुहैया कराया जाएगा। इसमें आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर है।
सरकार ने 13 उच्च प्राथमिकता वाले राज्यों के 130 जिलों के लिए विशेष रणनीति बनाई है। यहां सुमन पैकेज के तहत गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन और गुणवत्तापूर्ण जांच सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
रोडमैप में देखभाल करने वालों के लिए वित्तीय सहायता का प्रस्ताव भी है। आपातकालीन स्थिति के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था और बर्थ वेटिंग होम जैसी सुविधाएं बनाई जाएंगी। साथ ही, सामुदायिक भागीदारी के तहत 'सुमन पंचायत' और 'मदर्स पिकनिक' जैसी नई पहल शुरू होंगी, ताकि शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव और टीकाकरण का लक्ष्य पूरा हो सके।















