नई दिल्ली, 01 जुलाई।
ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को नई गति देने के उद्देश्य से एसएचई-लीप्स डिजिटल मंच की शुरुआत की गई है। यह मंच स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को टिकाऊ उद्यम स्थापित करने, वित्तीय समावेशन बढ़ाने और डिजिटल रूप से सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए तैयार किया गया है। डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन द्वारा विकसित इस प्लेटफॉर्म का संचालन लोकओएस के माध्यम से किया जाएगा।
एसएचई-लीप्स का पूरा नाम सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर-लाइवलीहुड्स एंड एंटरप्राइज एप्लीकेशन फॉर प्रॉस्पेरिटी एंड सस्टेनेबिलिटी है। इसका शुभारंभ 29 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दौरान किया गया। ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में ग्रामीण विकास की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा के साथ विकसित ग्राम-विकसित भारत के लक्ष्य पर भी चर्चा हुई।
यह मंच देशभर के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्वरोजगार, उद्यम विकास और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में सहयोग प्रदान करेगा। कृषि और गैर-कृषि दोनों प्रकार के उद्यमों को इसमें शामिल किया गया है, ताकि जमीनी स्तर पर ग्रामीण उद्यमिता को मजबूती मिलने के साथ टिकाऊ आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके।
इस पहल का आधार लोकओएस डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर स्तरीय महासंघ जैसे सामुदायिक संगठनों के कार्यों का डिजिटलीकरण करता है। इसमें सदस्यों का विवरण, वित्तीय लेन-देन, आजीविका गतिविधियां और विभिन्न योजनाओं के समन्वय से जुड़ी जानकारियां दर्ज की जाती हैं।
इसी डिजिटल व्यवस्था पर आधारित एसएचई-लीप्स ग्रामीण उद्यमियों के कारोबार से संबंधित आंकड़ों को वास्तविक समय में दर्ज करेगा। इसके माध्यम से उद्यम की शुरुआत से लेकर उसके प्रदर्शन और आय में होने वाली प्रगति तक की पूरी जानकारी दर्ज और निगरानी की जा सकेगी। इससे प्रशासनिक निगरानी, योजना निर्माण और आंकड़ों पर आधारित नीति निर्धारण को भी मजबूती मिलेगी।
इस मंच का विस्तार देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक किया जाएगा। इसके माध्यम से राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों को महिला संचालित उद्यमों की निगरानी और उन्हें प्रोत्साहित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों की बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी।
एसएचई-लीप्स को सरकार की महत्वाकांक्षी लखपति दीदी पहल को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह मंच लाभार्थियों के उद्यम प्रदर्शन और आय वृद्धि की चरणबद्ध निगरानी करेगा, जिससे यह आकलन किया जा सकेगा कि वे लखपति दीदी बनने की दिशा में कितनी प्रगति कर रही हैं।
सरकार ने लखपति दीदी योजना का लक्ष्य तीन करोड़ से बढ़ाकर छह करोड़ महिलाओं तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही अगले पांच वर्षों में इस पहल के समर्थन के लिए 10 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई है। इस व्यापक प्रयास के अंतर्गत एसएचई-लीप्स महिला उद्यमों के विस्तार और उनकी प्रगति की निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल माध्यम के रूप में कार्य करेगा।
डिजिटल ढांचे, उद्यमिता और वित्तीय समावेशन को एक साथ जोड़ने वाला यह मंच ग्रामीण भारत के डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। देशभर में इसके विस्तार के साथ एसएचई-लीप्स महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने, टिकाऊ आजीविका को मजबूत करने और समावेशी ग्रामीण विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाएगा।















