कोडाइकनाल, 01 जुलाई।
एआई की मदद से वैज्ञानिकों ने कोडाइकनाल सौर वेधशाला के 100 वर्ष से अधिक पुराने हाथ से तैयार किए गए सौर अभिलेखों का विश्लेषण कर सूर्य की चुंबकीय गतिविधि का सबसे लंबे निरंतर रिकॉर्ड में से एक तैयार किया है। इस अध्ययन से समय के साथ बदलने वाले सौर चक्रों को बेहतर ढंग से समझने में नई जानकारी मिली है।
यह अध्ययन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज) के शोधकर्ता दिव्य कीर्ति मिश्रा के नेतृत्व में किया गया। इसमें भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, अमेरिका के साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट और भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया। शोध के निष्कर्ष द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
वैज्ञानिक लंबे समय से सूर्य की चुंबकीय गतिविधि का अध्ययन करते रहे हैं। यह गतिविधि निश्चित चक्रों के अनुसार बदलती है और सूर्य कलंक, सौर ज्वालाओं तथा विस्फोटों जैसी घटनाओं को प्रभावित करती है। इनका असर पृथ्वी पर उपग्रहों, नेविगेशन प्रणाली, संचार नेटवर्क और विद्युत ग्रिड पर पड़ सकता है। हालांकि पुराने अभिलेखों की असंगति के कारण लंबे समय के अध्ययन में कठिनाइयां आती रही हैं।
शोधकर्ताओं ने इस चुनौती से निपटने के लिए मशीन लर्निंग आधारित यू-नेट मॉडल का उपयोग किया। इसके जरिए कोडाइकनाल सौर वेधशाला के वर्ष 1904 से 2022 तक के डिजिटाइज किए गए हाथ से तैयार संचार्ट का विश्लेषण किया गया। इन अभिलेखों में सूर्य कलंक, प्लाज, फिलामेंट और प्रोमिनेंस का दैनिक विवरण दर्ज है।
एआई मॉडल ने प्रत्येक स्कैन की गई छवि में पहले सूर्य की डिस्क की पहचान की और उसके केंद्र, आकार तथा दिशा का सटीक निर्धारण किया। इसके बाद वर्ष 1916 से 2007 के बीच नौ सौर चक्रों के दौरान सूर्य की चुंबकीय रूप से सक्रिय चमकीली संरचनाओं यानी प्लाज की स्वतः पहचान कर उनका मानचित्र तैयार किया गया।
प्राप्त आंकड़ों के आधार पर शोधकर्ताओं ने समय और अक्षांश पर आधारित बटरफ्लाई डायग्राम तैयार किया, जिससे यह समझने में मदद मिली कि अलग-अलग सौर चक्रों के दौरान सूर्य की चुंबकीय गतिविधि विभिन्न अक्षांशों में किस प्रकार स्थानांतरित होती है। अध्ययन में पाया गया कि हाथ से तैयार अभिलेखों से प्राप्त प्लाज का पैटर्न कोडाइकनाल सौर वेधशाला की सीए द्वितीय के सौर छवियों से प्राप्त आंकड़ों के काफी अनुरूप है, जिससे ऐतिहासिक अभिलेखों की विश्वसनीयता की पुष्टि हुई।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार इन एक सदी पुराने अभिलेखों को मशीन द्वारा पढ़े जा सकने वाले आंकड़ों में बदलने से ऐतिहासिक और आधुनिक अंतरिक्ष युग के आंकड़ों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे सूर्य के चुंबकीय व्यवहार में लंबे समय के बदलावों को समझने में वैज्ञानिकों को सहायता मिलेगी।
अध्ययन में यह भी रेखांकित किया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पुराने वैज्ञानिक अभिलेखों को संरक्षित करने और उनका विश्लेषण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पहले चित्रों की शैली, कागज की स्थिति और स्कैन की गुणवत्ता में अंतर के कारण इन अभिलेखों का उपयोग कठिन माना जाता था।
शोधकर्ताओं का कहना है कि सूर्य की चुंबकीय गतिविधि के दीर्घकालिक रिकॉर्ड अंतरिक्ष मौसम के बेहतर मॉडल विकसित करने, अतीत की सौर गतिविधियों का पुनर्निर्माण करने तथा उपग्रह संचालन, संचार प्रणालियों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।















