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विज्ञान व प्रौद्योगिकी
01 Jul, 2026

GAGAN से मजबूत हुई भारत की विमानन नेविगेशन प्रणाली, कई क्षेत्रों में बढ़ा उपयोग

इसरो और एएआई द्वारा विकसित GAGAN प्रणाली विमानन सुरक्षा, सटीक नेविगेशन और सैटेलाइट आधारित लैंडिंग को नई मजबूती दे रही है। अब इसका उपयोग परिवहन, रक्षा, आपदा प्रबंधन और दूरसंचार सहित कई क्षेत्रों में हो रहा है।

नई दिल्ली, 01 जुलाई।

भारत की स्वदेशी जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन (GAGAN) प्रणाली देश की सैटेलाइट नेविगेशन व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला बनकर उभरी है। यह प्रणाली विमानों को अधिक सटीक नेविगेशन सुविधा उपलब्ध कराकर उड़ान सुरक्षा को मजबूत बना रही है। इसके साथ ही परिवहन, आपदा प्रबंधन, रक्षा, दूरसंचार और सर्वेक्षण जैसे कई क्षेत्रों में भी इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित GAGAN एक सैटेलाइट-बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (SBAS) है, जो ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) के संकेतों की सटीकता बढ़ाने के लिए वास्तविक समय (रियल-टाइम) में सुधार और विश्वसनीयता संबंधी जानकारी उपलब्ध कराता है।

वर्ष 2015 से परिचालन में आने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास कार्यरत एसबीएएस प्रणाली है। अमेरिका, यूरोप और जापान के बाद भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला देश बना। साथ ही, भूमध्यरेखीय क्षेत्र में संचालन के लिए प्रमाणित होने वाला यह दुनिया का पहला एसबीएएस भी है।

जून 2026 में GAGAN ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इस तकनीक की मदद से वाणिज्यिक विमान की भारत में पहली सैटेलाइट-आधारित लैंडिंग सफलतापूर्वक कराई।

GAGAN का नेटवर्क 15 भारतीय रेफरेंस स्टेशनों, दो मास्टर कंट्रोल सेंटर, तीन लैंड अपलिंक स्टेशन, चार संचार नेटवर्क तथा GAGAN पेलोड से लैस तीन भू-स्थिर उपग्रहों—GSAT-8, GSAT-10 और GSAT-15—से मिलकर बना है। यह नेटवर्क जीपीएस संकेतों की निगरानी कर आवश्यक सुधारों की गणना करता है और भारतीय फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन में बेहतर नेविगेशन सूचना प्रसारित करता है।

यह प्रणाली भारत की स्वदेशी नाविक (NavIC) नेविगेशन प्रणाली का पूरक है। जहां नाविक पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं प्रदान करता है, वहीं GAGAN जीपीएस संकेतों को अधिक सटीक बनाकर विमानों की प्रिसिजन नेविगेशन और सैटेलाइट आधारित लैंडिंग को संभव बनाता है।

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानकों के अनुरूप विकसित GAGAN अमेरिका के WAAS, यूरोप के EGNOS और जापान के MSAS जैसी वैश्विक प्रणालियों के साथ भी इंटरऑपरेबल है।

सरकार के अनुसार, GAGAN का उपयोग केवल विमानन तक सीमित नहीं है। यह समुद्री नेविगेशन, स्मार्ट सड़क परिवहन, रेलवे संचालन, आपदा प्रबंधन, रक्षा, दूरसंचार तथा उच्च सटीकता वाले सर्वेक्षण एवं मैपिंग कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार का मानना है कि GAGAN और NavIC मिलकर भारत की स्वदेशी नेविगेशन क्षमता को और मजबूत करेंगे तथा विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में अहम योगदान देंगे।

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