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राजनीति
06 Jul, 2026

चरित्र निर्माण भी शिक्षा का मूल उद्देश्य होना चाहिए: सैयद अता हसनैन

वाराणसी में बीएचयू के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता का विकास भी होना चाहिए।

वाराणसी, 06 जुलाई।

बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना और रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक सोच, नैतिक मूल्यों, चरित्र निर्माण और जिम्मेदार नागरिकता का विकास भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शोध, नवाचार, अंतर्विषयक अध्ययन और उद्योगों के साथ सहयोग को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करने वाले रणनीतिक संस्थानों के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शैक्षिक सुधारों को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना जरूरी है।

राज्यपाल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और भ्रामक सूचनाओं जैसी वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को बदलते समय की इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार करें।

कार्यक्रम में यूनेस्को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन फॉर पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के निदेशक प्रो. ओबिजियोफोर अगिनम ने कहा कि शिक्षा समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने करुणा, सहानुभूति और मानवीय मूल्यों पर आधारित विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया और शिक्षा के लिए यूनेस्को की न्यू सोशल कॉन्ट्रैक्ट की अवधारणा का भी उल्लेख किया।

बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि इंटरनेट, तकनीकी विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में उच्च शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में विश्वविद्यालयों को शिक्षण पद्धति, परीक्षा प्रणाली और पाठ्यक्रम की पुनर्समीक्षा करनी होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य नहीं बदला है, लेकिन उसे प्राप्त करने के तरीके समय के अनुरूप विकसित होने चाहिए।

सम्मेलन के प्रारंभ में मालवीय सेंटर फॉर पीस रिसर्च के समन्वयक प्रो. मनोज कुमार मिश्र ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों से प्रेरणा लेकर 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप शैक्षिक सुधार पर गंभीर चर्चा करना है। कार्यक्रम में देशभर से शिक्षाविद्, नीति-निर्माता, शोधार्थी, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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