नई दिल्ली, 07 जुलाई।
नर्मदा नदी परियोजना से जुड़े लंबे समय से लंबित भुगतान विवाद का चार राज्यों के बीच समाधान हो गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच नर्मदा अवार्ड से संबंधित लंबित देयों के निपटारे पर समझौता हुआ।
नई दिल्ली में आयोजित बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। बैठक में केंद्र और चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
यह समझौता सरदार सरोवर परियोजना की लागत साझेदारी से जुड़े वर्षों पुराने विवादों को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके तहत लंबित भुगतान का एकमुश्त निपटान किया जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच नर्मदा अवार्ड के लंबित भुगतान को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसका अब सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के कारण कई पुराने विवाद तेजी से सुलझाए जा रहे हैं।
अमित शाह ने चारों राज्यों की सरकारों की सराहना करते हुए कहा कि इस अंतरराज्यीय परियोजना पर सहमति बनाना सभी के सहयोग से संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि नर्मदा परियोजना से मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को विशेष लाभ मिला है। बांध निर्माण के बाद इन राज्यों में पानी और बिजली की उपलब्धता बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान को मिलने वाला लाभ भले ही क्षेत्रफल के लिहाज से छोटा दिखाई दे, लेकिन जिन क्षेत्रों तक नर्मदा का पानी पहुंचा है, वहां जमीन का मूल्य और किसानों की स्थिति दोनों में बड़ा बदलाव आया है।
अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार जल विवादों के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा-राजस्थान जल विवाद सहित कई मामलों का समाधान सहकारी संघवाद का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि पानी का उपयोग देश के किसी भी हिस्से में हो, उसका लाभ अंततः भारतीयों को ही मिलता है। पड़ोसी राज्यों की समृद्धि का फायदा सभी राज्यों को मिलता है, इसलिए विवादों को राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए सुलझाना चाहिए।















