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संपादकीय
07 Jul, 2026

लड़कियों पर बढ़ता नशे का प्रभाव : एक गंभीर सामाजिक समस्या

बदलती जीवनशैली, मानसिक दबाव, सोशल मीडिया और साथियों के प्रभाव के बीच लड़कियों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति समाज, परिवार और शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

नई दिल्ली, 7 जुलाई।

नशे की लत आज के दौर की सबसे बड़ी सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों में से एक बन गई है। पहले नशे को मुख्य रूप से पुरुषों से जोड़ा जाता था, लेकिन अब आंकड़े बताते हैं कि लड़कियों और युवा महिलाओं में भी नशे का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इस बदलाव ने परिवारों, शिक्षकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं सभी को चिंतित कर दिया है। यह केवल किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक चुनौती है, जिसके लिए सामूहिक ध्यान और प्रयास जरूरी हैं।

इसके पीछे कई कारण आपस में जुड़े हुए हैं। तेजी से बदलता समाज, पढ़ाई का दबाव, करियर की महत्वाकांक्षा, भावनात्मक तनाव, दोस्तों का प्रभाव और सोशल मीडिया का असर—इन सबका बड़ा योगदान है। कई बार लड़कियां ऐसे माहौल में रहती हैं, जहां नशे को सामान्य माना जाता है या उसे आजादी, आत्मविश्वास और आधुनिक जीवनशैली का प्रतीक बताया जाता है। ऐसी सोच के कारण प्रयोग के तौर पर नशा करना आसान लगने लगता है, जबकि इसके परिणाम बहुत खतरनाक हो सकते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य भी इसमें अहम भूमिका निभाता है। कई किशोरियां और युवा महिलाएं चिंता, अवसाद, अकेलेपन, आत्मविश्वास की कमी और सामाजिक अपेक्षाओं के दबाव से जूझती हैं। जब पर्याप्त भावनात्मक सहारा नहीं मिलता, तो कुछ लड़कियां समस्याओं से बचने के लिए नशे का सहारा लेती हैं। दुर्भाग्य से नशा किसी समस्या का समाधान नहीं करता, बल्कि भावनात्मक तकलीफ को और बढ़ा देता है। साथ ही, लत और सामाजिक अलगाव जैसी नई मुश्किलें भी पैदा करता है।

दोस्तों का दबाव भी एक बड़ा कारण है। किशोरावस्था में सबके साथ घुलने-मिलने और स्वीकार किए जाने की चाह बहुत मजबूत होती है। कई लड़कियां समूह से बाहर न हो जाएं, इस डर से नशा आजमाने के लिए मजबूर हो जाती हैं। अलग दिखने या पुराने विचारों वाली कहलाने के डर से वे जोखिम को भूल जाती हैं। इसलिए बच्चों को बचपन से ही स्वतंत्र निर्णय लेने और आत्मविश्वास की शिक्षा देना जरूरी है।

सोशल मीडिया और लोकप्रिय संस्कृति के प्रभाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फिल्में, म्यूजिक वीडियो और ऑनलाइन कंटेंट कभी-कभी नशे को स्टाइलिश और रोमांचक दिखाते हैं। इससे सीधे लत नहीं लगती, पर सोच और नजरिए पर असर जरूर पड़ता है, खासकर किशोरावस्था में। इसलिए मीडिया साक्षरता और आलोचनात्मक सोच विकसित करना जरूरी है, ताकि युवा मनोरंजन और हकीकत में फर्क समझ सकें।

लड़कियों में नशे के दुष्परिणाम केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं हैं। इससे पढ़ाई, रिश्ते और करियर सभी प्रभावित होते हैं। एकाग्रता कम हो जाती है, निर्णय लेने की क्षमता घटती है, भावनात्मक अस्थिरता आती है और कई स्वास्थ्य समस्याएं जन्म लेती हैं। गंभीर मामलों में लत ऐसी मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्याएं पैदा कर देती है, जिनसे बिना पेशेवर मदद के बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

परिवार इस लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। खुला संवाद, भावनात्मक सहयोग और एक सुरक्षित घरेलू माहौल नशे के खतरे को बहुत हद तक कम कर सकते हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे दोस्तों के दबाव, मानसिक स्वास्थ्य और नशे के नुकसान पर डर या दोष लगाए बिना ईमानदारी से बात करें। जब युवा महसूस करते हैं कि उन्हें समझा जा रहा है, तो वे मुश्किल समय में मदद मांगने से नहीं हिचकते।

शैक्षणिक संस्थानों को भी आगे आना होगा। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम, काउंसलिंग और जीवन-कौशल की शिक्षा दी जानी चाहिए। खेल, रचनात्मक गतिविधियां, समाज सेवा और नेतृत्व के अवसर देने से बच्चों को सकारात्मक विकल्प मिलते हैं और वे गलत प्रभावों के सामने मजबूत बनते हैं।

सरकार और समाज को मिलकर काम करना होगा। जन-जागरूकता अभियान, सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और पुनर्वास कार्यक्रम इस समस्या से निपटने के जरूरी हिस्से हैं। नशे की लत से जूझ रहे लोगों को कलंकित करने के बजाय करुणा, इलाज और समाज में दोबारा जोड़ने पर ध्यान देना चाहिए। समय पर सहयोग और समझ मिले, तो रिकवरी संभव है। साथ ही, हमें सामान्यीकरण और रूढ़ियों से बचना चाहिए। अधिकांश लड़कियां नशे से दूर हैं और आज के कठिन समय में भी बहुत मजबूती दिखाती हैं। उद्देश्य डर फैलाना या दोष देना नहीं है, बल्कि उभरते खतरों को पहचानकर युवाओं की रक्षा के लिए संसाधन देना और उन्हें स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए सशक्त बनाना है।

लड़कियों पर नशे का बढ़ता प्रभाव एक गंभीर सामाजिक मुद्दा है, जिस पर परिवार, स्कूल, स्वास्थ्य व्यवस्था और पूरे समाज को ध्यान देना होगा। शिक्षा, भावनात्मक सहारा और सकारात्मक रोल मॉडल के जरिए रोकथाम ही सबसे असरदार उपाय है। यदि हम ऐसा माहौल बना सकें, जहां युवा महिलाएं खुद को सम्मानित, सुना हुआ और समर्थित महसूस करें, तो हम उन्हें स्वस्थ, उत्पादक और संतुष्ट जीवन जीने में मदद कर सकते हैं।

- डॉ. विजय गर्ग

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