नई दिल्ली, 9 जुलाई।
भारत-रूस आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक में सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों द्वारा नई तकनीकों के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और रूस के उप विदेश मंत्री दिमित्री ल्यूबिंस्की ने की। इसमें दोनों देशों के विभिन्न मंत्रालयों और सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, 8 जुलाई को आयोजित इस बैठक में दोनों देशों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा की। विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद पर चिंता जताते हुए 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले तथा 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के निकट हुए आतंकी हमले की भी कड़े शब्दों में निंदा की गई।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आतंकवाद विरोधी सहयोग से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति में सूचीबद्ध आतंकवादी संगठनों, उनसे जुड़े नेटवर्क और प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
दोनों देशों ने कट्टरपंथ, उग्रवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और नई एवं उभरती तकनीक तथा डिजिटल वित्तीय प्रणालियों के आतंकी दुरुपयोग जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।
बैठक में वैश्विक आतंकवाद से जुड़े क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय खतरों पर भी विचार-विमर्श किया गया। भारत और रूस ने संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, यूरेशियन ग्रुप (ईएजी) और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ समन्वय और सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही यह भी तय किया गया कि संयुक्त कार्य समूह की अगली बैठक आपसी सहमति से निर्धारित तिथि पर रूस में आयोजित की जाएगी।















