रायपुर, 13 जुलाई।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद कांग्रेस ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाया। इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस ने कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इसे छत्तीसगढ़ से संबंधित विषय नहीं मानते हुए अस्वीकार कर दिया। इसके बाद हुए हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि उन्होंने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर चर्चा के लिए कार्य स्थगन प्रस्ताव दिया है। उनका कहना था कि छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ रामभक्तों की आस्था के साथ छल हुआ है। इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह विधानसभा के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। जवाब में कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने भी राम मंदिर निर्माण में योगदान दिया है, इसलिए इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए। डॉ. महंत ने कहा कि 23 फरवरी 2024 को सदन में कृतज्ञता ज्ञापन लाया गया था और तब सदन की भावना इससे जुड़ी थी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस विषय पर निंदा प्रस्ताव लाती है तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी और छत्तीसगढ़ के लोगों के धन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा चाहती है।
अजय चंद्राकर ने कहा कि यदि लूट हुई है तो उसका नाम स्पष्ट किया जाए। इस पर डॉ. महंत ने कहा कि जिस राम के नाम की चर्चा हर जगह होती है, उसी विषय पर चर्चा का विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले सदन में कृतज्ञता ज्ञापन लाकर आस्था और समर्पण की भावना व्यक्त की गई थी, लेकिन अब इसी विषय पर चर्चा से परहेज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने भी राम मंदिर के लिए ईंट और धन का योगदान दिया है।
इस दौरान अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कई सवाल उठाए। भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने भी कांग्रेस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने राम के अस्तित्व को नकारा था। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जब राज्य से शिलापूजन और मंदिर निर्माण के लिए धन गया तथा लोगों ने चंदा दिया, तो उस धन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि यदि लोगों के पैसे से जुड़ा मामला है तो उस पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने भूपेश बघेल से पूछा कि उन्होंने कितना योगदान दिया था। इस पर भूपेश बघेल ने कहा कि उन्होंने रामजन्मभूमि ट्रस्ट को 1 लाख 21 हजार रुपये का चेक देकर सहयोग किया था।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कांग्रेस सदस्यों की ओर से इस विषय पर चर्चा के लिए नोटिस मिले थे, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि यह छत्तीसगढ़ से संबंधित विषय नहीं है। अध्यक्ष के निर्णय के बाद भी कांग्रेस विधायक चर्चा की मांग पर अड़े रहे, जिसके चलते पहले कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विपक्ष ने फिर से यही मुद्दा उठाया और राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े पोस्टर लहराए। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच फिर तीखी नोकझोंक हुई। सदन में दोनों पक्षों की ओर से जय श्री राम के नारे लगे। कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते रहे, जबकि सत्ता पक्ष ने भी जवाबी नारे लगाए। अजय चंद्राकर ने कहा कि अध्यक्ष अपना निर्णय सुना चुके हैं और बार-बार वही विषय उठाना अध्यक्ष के निर्णय का अनादर है।
दोनों पक्षों के बीच लगातार विधानसभा में हंगामा और नोकझोंक जारी रही। आखिरकार अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी।
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में काला दिन है। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने भी मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था, इसलिए पूरे मामले की जांच कराई जानी चाहिए।















