नई दिल्ली, 13 जुलाई।
तमिलनाडु में गोवध के मुद्दे पर छिड़ी कानूनी लड़ाई में नया मोड़ आया है। उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें राज्य में पशुवध पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के पिछले फैसले के क्रियान्वयन को स्थगित करने का निर्देश जारी किया है।
मद्रास उच्च न्यायालय ने बीते 27 मई को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए गाय और बछड़े के वध पर हर जगह और हर समय पूर्ण पाबंदी का आदेश दिया था। इसे चुनौती देते हुए तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सरकार का तर्क था कि उच्च न्यायालय का यह निर्णय राज्य के 'तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट' के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन करता है।
याचिका में स्पष्ट किया गया कि राज्य के मौजूदा कानून के तहत उन गायों के वध की अनुमति है जो उम्रदराज होने के कारण प्रजनन या काम करने में अक्षम हैं। साथ ही, पशुओं के वध को लेकर पशु क्रूरता निवारण और स्थानीय निकाय अधिनियमों में भी निश्चित शर्तें निर्धारित हैं, जो पूर्ण प्रतिबंध की बात नहीं करतीं। उच्च न्यायालय के आदेश को इन वैधानिक प्रावधानों के विपरीत बताते हुए सरकार ने इसे पलटने की गुहार लगाई थी, जिस पर अब सर्वोच्च अदालत ने राहत दी है।














