जबलपुर, 13 जुलाई।
जबलपुर की एक अदालत ने स्थगन आदेश की अवमानना के मामले में सोमवार को शहर निवासी सुरेश मक्कड़ को 15 दिन के सिविल कारावास की सजा सुनाई। अपर जिला न्यायाधीश चंद्र किशोर बारपेटे ने यह आदेश सालीवाड़ा स्थित जसरोटिया परिवार की संपत्ति से जुड़े विवाद में पारित किया।
प्रकरण के अनुसार, विजय भाटिया और उनके भाई-बहनों ने गीता जसरोटिया सहित अन्य के खिलाफ संपत्ति के बंटवारे, घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा के लिए दीवानी वाद दायर किया था। वादियों का दावा है कि स्वर्गीय सावित्री देवी की वसीयत के अनुसार उनकी पुत्री स्वर्गीय रीता जसरोटिया का संपत्ति में हिस्सा था। रीता जसरोटिया के निधन के बाद उस हिस्से पर उनके सभी भाई-बहनों का समान अधिकार बनता है।
वादियों ने आरोप लगाया कि गीता जसरोटिया ने संपत्ति का विधिवत बंटवारा हुए बिना उसके बड़े हिस्से को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए अलग-अलग लोगों को बेच दिया। इसी आधार पर न्यायालय से संपत्ति के बंटवारे, अधिकारों की घोषणा और अन्य राहत देने की मांग की गई।
मामले में उच्च न्यायालय ने 2 नवंबर 2022 को आदेश 39 नियम 1 एवं 2 के तहत अंतरिम आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया था कि वाद लंबित रहने तक कोई भी पक्षकार विवादित संपत्ति के किसी भी हिस्से का तीसरे पक्ष के पक्ष में हस्तांतरण नहीं करेगा।
सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष यह तथ्य आया कि सुरेश मक्कड़ ने विवादित संपत्ति का एक हिस्सा 6 अगस्त 2022 को खरीदा था। इसके बाद भी स्थगन आदेश की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने 30 मार्च 2024 को उक्त भूमि पवन सोनी और सुधा सोनी के पक्ष में विक्रय कर दी।
अपर जिला न्यायाधीश चंद्र किशोर बारपेटे ने अपने आदेश में कहा कि सुरेश मक्कड़ ने न्यायालय के स्पष्ट स्थगन आदेश का उल्लंघन किया है, जो न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर उन्हें 15 दिन के सिविल कारावास की सजा सुनाई गई। मामले में वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता दीपक पंजवानी और नेहा भाटिया ने पैरवी की।















