नई दिल्ली, 13 जुलाई।
भारतीय नौसेना की ताकत में अभूतपूर्व इजाफा हुआ है। पिछले एक महीने के भीतर चार नए स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया है। इससे भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो गई है।
हालिया कड़ी में, 11 तारीख को आईएनएस महेंद्रगिरी को नौसेना में शामिल किया गया। यह नीलगिरी-श्रेणी का छठा स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से डिजाइन किया गया है।
इससे ठीक पहले, पिछले महीने की 21 तारीख को तीन अन्य स्वदेशी प्लेटफॉर्म का जलावतरण हुआ था। इनमें आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय शामिल हैं।
नीलगिरी-श्रेणी के ये फ्रिगेट 'प्रोजेक्ट 17ए' के तहत निर्मित किए गए हैं। इनका मुख्य कार्य युद्ध के दौरान एंटी-एयर, एंटी-सरफेस और एंटी-सबमरीन मिशनों में सक्रिय भूमिका निभाना है। प्रोजेक्ट 17ए सात अत्याधुनिक गाइडेड-मिसाइल युद्धपोतों का निर्माण करने वाला एक बड़ा कार्यक्रम है।
इन युद्धपोतों की खासियत इनकी स्टील्थ तकनीक, बेहतर उत्तरजीविता और रडार में आसानी से न आने की क्षमता है। इनमें उच्च स्तर के ऑटोमेशन का उपयोग किया गया है, जिससे ये समुद्री युद्ध के हर आयाम में सक्षम हैं।
ये पोत आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करते हुए देश के रक्षा विनिर्माण तंत्र को नई ऊंचाई दे रहे हैं। इनसे न केवल समुद्री सुरक्षा पुख्ता होगी, बल्कि भारत की ब्लू इकोनॉमी को भी बल मिलेगा और एक बड़ी समुद्री शक्ति के रूप में देश की स्थिति और मजबूत होगी।















