नई दिल्ली, 13 जुलाई।
धार स्थित बहुचर्चित भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद विवाद एक बार फिर उच्चतम न्यायालय की दहलीज पर है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए हालिया आदेश के विरुद्ध मुस्लिम पक्ष की ओर से दाखिल याचिका पर अब शीर्ष अदालत में 14 जुलाई को महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। सोमवार को मुस्लिम पक्ष के वकील हुफैजा अहमदी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह मुद्दा उठाया कि उनकी याचिका सुनवाई सूची में शामिल नहीं है, जिसके बाद पीठ ने इसे भी कल की तारीख में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
इस पूरे प्रकरण में हिन्दू पक्ष की ओर से जीतेंद्र सिंह विसेन ने न्यायालय में केवियट दाखिल कर दी है। उन्होंने आग्रह किया है कि उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली किसी भी याचिका पर सुनवाई के दौरान उनका पक्ष सुने बिना कोई भी आदेश पारित न किया जाए। यह विवाद दशकों से चर्चा में है और दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के साथ न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट किया था कि भोजशाला परिसर माता सरस्वती का मंदिर है। अदालत ने अपने उस पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत वहां नमाज पढ़ने की अनुमति प्रदान की गई थी। हिन्दू संगठनों का दावा है कि 1034 ईस्वी में राजा भोज द्वारा निर्मित यह स्थल मूलतः सरस्वती मंदिर ही है, जो अब न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अपने पुराने स्वरूप की पहचान की राह पर है।















