नई दिल्ली, 14 जुलाई।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधारों की घोषणा करते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के पूर्ण डिजिटलीकरण के लिए ‘रेल भूमि’ पोर्टल शुरू किया जाएगा। यह वेब आधारित मंच भूमि अधिग्रहण को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाएगा तथा विभिन्न रेलवे प्रणालियों को एकीकृत कर परियोजनाओं की निगरानी, मुआवजा वितरण और वैधानिक प्रक्रियाओं का संचालन ऑनलाइन करेगा।
रेल भवन में मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में वैष्णव ने कहा कि रेलवे में व्यापक सुधार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में वर्ष 2026 के दौरान 52 सुधार लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि निर्माण, माल परिवहन, कौशल विकास, वैगन डिजाइन और कंटेनर नीति सहित कई क्षेत्रों में व्यापक बदलाव किए गए हैं।
रेल मंत्री ने कहा कि अब फ्लाई ऐश का परिवहन खुले वैगनों के स्थान पर कंटेनरों के माध्यम से किया जाएगा। इससे परिवहन, भंडारण और अनलोडिंग के दौरान होने वाले धूल प्रदूषण में कमी आएगी। उन्होंने बताया कि देश में हर वर्ष लगभग 340 मिलियन मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उत्पादन होता है, जिसमें से 96 मिलियन मीट्रिक टन का उपयोग सीमेंट उद्योग में होता है, जबकि रेलमार्ग से केवल 13 मिलियन मीट्रिक टन यानी करीब चार प्रतिशत फ्लाई ऐश का परिवहन किया जाता है। कंटेनर आधारित व्यवस्था से सामग्री का सुरक्षित भंडारण और आसान हैंडलिंग भी संभव होगी।
उन्होंने बताया कि कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर नीति में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं। अब पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क के लिए एकीकृत अखिल भारतीय लाइसेंस की व्यवस्था होगी। सभी मार्गों के लिए 25 करोड़ रुपये का समान पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है। साथ ही 20 वर्ष तक सफल संचालन के बाद लाइसेंस के नवीनीकरण पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे कंटेनर परिवहन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था अधिक सरल तथा किफायती बनेगी।
रेल मंत्री ने कहा कि उर्वरकों का परिवहन भी अब कंटेनरों के माध्यम से किया जा सकेगा। मालभाड़ा व्यवस्था को सरल बनाते हुए प्रति टन प्रति किलोमीटर के आधार पर नई प्रणाली लागू की गई है। कंटेनर आधारित व्यवस्था से उर्वरकों का सुरक्षित भंडारण, सुगम वितरण और रैक की अनावश्यक रोकथाम से बचाव संभव होगा।
निर्माण क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए वैष्णव ने कहा कि रेलवे परियोजनाओं में ठेकेदारों को कार्य शुरू होने से पहले 10 प्रतिशत प्रदर्शन सुरक्षा राशि जमा करनी होगी और इसके बाद चल रहे बिलों से कोई कटौती नहीं की जाएगी। जिन ठेकेदारों के लंबित मुकदमे उनकी शुद्ध संपत्ति के 50 प्रतिशत से अधिक होंगे, वे रेलवे की निविदाओं में भाग नहीं ले सकेंगे। इसके साथ ही कॉन्ट्रैक्टर ऑल रिस्क इंश्योरेंस और प्रोफेशनल इंडेम्निटी इंश्योरेंस को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि इन कदमों से सक्षम एजेंसियों की भागीदारी बढ़ेगी और परियोजनाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी।
उन्होंने रेलवे परियोजनाओं के लिए कौशल प्रमाणन नीति की भी घोषणा की। इसके तहत वेल्डर, प्लंबर, फिटर, राजमिस्त्री, कंक्रीट परीक्षक और अन्य तकनीकी कार्यों से जुड़े श्रमिकों का मानकीकृत मूल्यांकन किया जाएगा। उन्हें क्यूआर-कोड आधारित स्किल कार्ड जारी किए जाएंगे और अधिकतम 24 महीनों में यह व्यवस्था सभी रेलवे परियोजनाओं में लागू कर दी जाएगी।
वैष्णव ने बताया कि वैगन डिजाइन नीति में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब उद्योग जगत स्वयं माल वैगनों के नए डिजाइन तैयार कर सकेगा। कोई भी डिजाइनर या निर्माता अपना प्रस्ताव आरडीएसओ को भेज सकेगा। मूल्यांकन, प्रोटोटाइप परीक्षण, फील्ड ट्रायल और सुरक्षा प्रमाणन के बाद नए डिजाइन वाले वैगनों को रेलवे नेटवर्क में शामिल किया जाएगा। इससे विभिन्न उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप विशेष प्रकार के वैगनों का विकास संभव होगा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम, तेल एवं स्नेहक के परिवहन में भी नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत तेल कंपनियां अपनी आवश्यकता के अनुसार विशेष टैंक वैगन खरीद सकेंगी या लीज पर ले सकेंगी तथा नए डिजाइन वाले वैगनों का उपयोग कर सकेंगी।
रेल मंत्री ने बताया कि खाद्यान्न, आटा और दालों का परिवहन भी अब कंटेनर आधारित व्यवस्था के माध्यम से किया जाएगा। इससे माल की गुणवत्ता बनी रहेगी, अशुद्धियों की संभावना कम होगी और वितरण प्रणाली अधिक लचीली एवं प्रभावी बनेगी। इसके साथ ही मालभाड़ा व्यवस्था को भी प्रति टन प्रति किलोमीटर की दर के आधार पर सरल बनाया गया है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचे का विस्तार करना नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार, पारदर्शिता और दक्षता के आधार पर भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रेलवे प्रणाली विकसित करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में रेलवे सुधारों को लगातार गति मिल रही है और इन्हीं प्रयासों के तहत यह व्यापक सुधार अभियान लागू किया जा रहा है।















