बुडापेस्ट, 14 जुलाई।
हंगरी की संसद में सोमवार का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा। तिस्ज़ा पार्टी ने अपने दो-तिहाई बहुमत का इस्तेमाल करते हुए संवैधानिक संशोधन का 17वां प्रस्ताव पारित कर दिया है। इसके माध्यम से राष्ट्रपति तमास शुल्योक और संवैधानिक न्यायालय के प्रमुख पीटर पोल्ट को पद से हटाने का रास्ता साफ हो गया है।
प्रधानमंत्री पीटर माज्यार की सरकार ने सत्ता में आने के कुछ ही समय बाद यह बड़ा कदम उठाया है। विपक्षी फिदेस्ज़ पार्टी ने इस संशोधन का कड़ा विरोध किया और सदन से वॉकआउट कर दिया। उनका आरोप है कि सरकार इसके जरिए किसी भी पदाधिकारी को मनमाने ढंग से हटाने की ताकत हासिल कर रही है।
नियम के मुताबिक, राष्ट्रपति के पास पांच दिनों का वक्त है कि वह इस संशोधन पर हस्ताक्षर करें या इसे अदालत भेजें। यदि वे अदालत का रुख करते हैं, तो सरकार ने उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की चेतावनी दी है। सरकार ने संकट से बचने के लिए उन्हें इस्तीफा देने की भी सलाह दी है।
इस संशोधन की जद में केवल राष्ट्रपति ही नहीं, बल्कि कई अन्य बड़े अधिकारी भी आए हैं। नए कानून के तहत 70 वर्ष से अधिक उम्र के जजों को पद छोड़ना होगा और लगातार तीन कार्यकाल पूरे कर चुके सांसदों को फिर से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलेगी।
पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान की पार्टी के लिए यह बड़ा झटका है। पार्टी के भीतर भी बगावत के सुर उठने लगे हैं और वरिष्ठ नेता गेर्गेली गुल्यास ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बीच ओर्बान फुटबॉल विश्व कप का फाइनल देखने के लिए अमेरिका निकल गए हैं।














