मुंबई, 14 जुलाई।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) एपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर विवाद गहरा गया है। चुनाव प्रक्रिया को कानूनी चुनौती मिलने के बाद प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने मंगलवार को कहा कि मामले में पहले कानूनी राय ली जाएगी, इसके बाद पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में आगे का निर्णय किया जाएगा।
पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत पवार के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने अध्यक्ष पद का चुनाव कराया था, जिसमें उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया। इस चुनाव को राकांपा एपी के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने चुनौती देते हुए नए सिरे से चुनाव कराने और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की संशोधित सूची को अमान्य घोषित करने की मांग की है।
सच्चिदानंद सिंह की ओर से 9 जुलाई को भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया है कि पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत पवार के निधन के बाद नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट प्रफुल्ल पटेल को कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में दायित्व संभालना चाहिए था, जब तक शेष कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं हो जाता। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि यह चुनाव 16 फरवरी को भारत निर्वाचन आयोग को सौंपे गए संशोधित संविधान के अनुरूप होना चाहिए था।
सात पृष्ठों के नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पार्टी के महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना 18 फरवरी को प्रस्ताव पारित कर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी। इसमें यह भी कहा गया कि संविधान के अनुसार नियुक्त कार्यवाहक प्रमुख की मंजूरी के बिना राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाकर नए अध्यक्ष का चुनाव कराया गया, इसलिए सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष चुने जाने की वैधता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
यह कानूनी नोटिस सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल और बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है। इसमें पार्टी को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि तय अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष बनने के बाद सच्चिदानंद सिंह और बृजमोहन श्रीवास्तव को नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल नहीं किया गया था।
राकांपा एपी के प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने नोटिस में लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अध्यक्ष पद का चुनाव पार्टी के संविधान और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कराया गया था। उन्होंने कहा कि सभी प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से सुनेत्रा पवार को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना था और यह विवाद केवल अनावश्यक सनसनी फैलाने का प्रयास है।
प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि सच्चिदानंद सिंह के नोटिस पर कानूनी विशेषज्ञों से राय ली जाएगी। इसके बाद कोर कमेटी की बैठक में उस सलाह पर विचार कर नोटिस का जवाब देने और सच्चिदानंद सिंह के खिलाफ संभावित कार्रवाई पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।















