नई दिल्ली, 14 जुलाई।
जल संकट आज भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, नदियां सूख रही हैं और मानसून की अनिश्चितता बढ़ रही है। ऐसे समय में तकनीक के जरिए जल प्रबंधन करना समय की मांग बन गया है। इसी दिशा में प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर एक ऐप आधारित पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य पानी की हर बूंद का रिकॉर्ड रखना और उसे बचाना है।
इस ऐप का मूल विचार सरल है। मोबाइल पर बनने वाले डिजिटल नक्शे में हर सरकारी जलस्रोत को दर्ज किया जाएगा, चाहे वह कुआं हो, बावड़ी, तालाब या चेकडैम। प्रत्येक स्रोत की स्थिति, गहराई, उपयोग और संरक्षण की जानकारी ऐप पर अपलोड की जाएगी। दिल्ली की एक सामाजिक संस्था ने इस परियोजना को तैयार किया है और अब इसे नौ राज्यों के 45 जिलों में लागू किया जा रहा है। झारखंड के रामगढ़ जिले को भी इसमें शामिल किया गया है, जहां पायलट प्रोजेक्ट के तहत 237 गांवों में सर्वे शुरू हो चुका है।
जलस्रोतों का सटीक डाटा उपलब्ध होने से योजनाएं अधिक प्रभावी बन सकेंगी। अभी तक अधिकांश गांवों में यह जानकारी कागजों या लोगों की याददाश्त तक सीमित थी। ऐप के माध्यम से हर जलस्रोत जियो-टैग होगा और फोटो सहित उसकी स्थिति दर्ज होगी। इससे यह तय करना आसान होगा कि कहां मरम्मत की जरूरत है और कहां नए जलस्रोत विकसित किए जाने चाहिए।
डिजिटल डाटा से पारदर्शिता भी बढ़ेगी। ग्राम पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक सभी के पास एक समान जानकारी होगी, जिससे फंड के दुरुपयोग की संभावना कम होगी। हालांकि इंटरनेट, प्रशिक्षण और डाटा के नियमित अद्यतन जैसी चुनौतियां भी हैं। फिर भी यह पहल जल संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो तकनीक के सहारे जल सुरक्षा और टिकाऊ विकास दोनों को नई मजबूती मिलेगी।














