नई दिल्ली, 14 जुलाई।
भारतीय सेना ने अग्निवीरों को दी जाने वाली प्रशिक्षण प्रक्रिया की जानकारी साझा करते हुए बताया कि हर चुनौती को पार करना ऑपरेशनल दक्षता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होता है। सेना के अनुसार, डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीरों को कठिन बाधा-पार प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है, जिससे उनमें सहनशक्ति, फुर्ती, मानसिक दृढ़ता और दबाव में निर्णय लेने का आत्मविश्वास विकसित होता है।
सेना ने बताया कि युद्धक्षेत्र की शारीरिक और मानसिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इस प्रशिक्षण का उद्देश्य तेज निर्णय क्षमता, टीमवर्क और विपरीत हालात में डटे रहने की योग्यता को मजबूत करना है। इसके साथ ही यह प्रशिक्षण सैन्य अभियानों के लिए आवश्यक अनुशासन और युद्ध भावना को भी विकसित करता है।
भारतीय सेना के अनुसार, वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप चरणबद्ध और मिशन आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से मुख्यालय मध्य भारत क्षेत्र युवा रंगरूटों को आत्मविश्वासी और युद्ध के लिए तैयार सैनिकों के रूप में विकसित कर रहा है। सेना का कहना है कि आज पार की गई हर बाधा भविष्य के एक सक्षम योद्धा की नींव मजबूत करती है।
सेना ने शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स द्वारा किए गए ‘स्पेशल हेलीबोर्न ऑपरेशन्स’ अभ्यास की जानकारी भी साझा की। सेना के मुताबिक, हाल ही में पैराट्रूपर्स ने आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए अपनी परिचालन क्षमता को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से शहरी क्षेत्र में बंधक मुक्ति जैसे चुनौतीपूर्ण परिदृश्यों का अभ्यास किया।
इस अभ्यास के दौरान टैक्टिकल हेलीकॉप्टर इंसर्शन, स्लिदरिंग, एसटीआईई और लो-होवर ड्रिल जैसी तकनीकों के माध्यम से हवा और जमीन के बीच बेहतर समन्वय का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद छत पर सटीक लैंडिंग और कमरों के भीतर त्वरित एवं सटीक कार्रवाई का भी अभ्यास कराया गया।
सेना ने बताया कि अभ्यास के प्रत्येक चरण में वास्तविक अभियान जैसी परिस्थितियों में गति, समन्वय, सटीकता और मजबूत टीमवर्क पर विशेष जोर दिया गया। ऐसे मिशन आधारित प्रशिक्षण से त्वरित कार्रवाई की क्षमता और युद्ध कौशल को मजबूती मिलती है तथा यह सुनिश्चित होता है कि भारतीय सेना के पैराट्रूपर्स किसी भी आपात स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार रहें।















