नई दिल्ली, 14 जुलाई।
उच्चतम न्यायालय ने सीबीएसई की नई तीन भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और बोर्ड को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को तय की गई है।
इससे पूर्व भी जून और मई माह में अदालत ने इसी तरह की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र व बोर्ड को नोटिस जारी किए थे। याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि नौवीं कक्षा में अचानक दो अतिरिक्त भाषाएं थोपना छात्रों के लिए अनुचित है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अनिवार्य रूप से दो भारतीय भाषाएं पढ़ना छात्रों की दसवीं की तैयारी पर भारी पड़ेगा। कम समय में अचानक नई भाषाएं सीखना और फिर बोर्ड परीक्षा देना उनके लिए तनावपूर्ण होगा।
यह नीति एक जुलाई से लागू की गई है। याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया है कि सीबीएसई ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों जैसे संबंधित हितधारकों से बिना उचित परामर्श किए ही यह बड़ा निर्णय लिया है।
नियम के अनुसार, यदि कोई छात्र विदेशी भाषा चुनना चाहता है, तो उसे केवल तीसरी भाषा के रूप में ही यह अवसर मिलेगा। छात्र व अभिभावक इसे शैक्षणिक दबाव बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं।















