वाराणसी, 14 जुलाई।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अब मरीजों को इलाज और पुनर्वास के लिए बेहतर सुविधा मिलने वाली है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में जल्द ही सेंटर फॉर फिजियोथेरेपी एवं ऑक्युपेशनल थेरेपी स्थापित करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद की 27 मई को हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है, जिसे चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
चिकित्सा संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता के अनुसार, इस केंद्र को स्थापित करने में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी का विशेष सहयोग और मार्गदर्शन रहा है। यह केंद्र न केवल मरीजों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान की दिशा में भी नई इबारत लिखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार ने बताया कि बदलती जीवनशैली, बढ़ती आयु, खेल के दौरान लगने वाली चोटों और न्यूरोलॉजिकल विकारों के दौर में फिजियोथेरेपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में यह थेरेपी अब एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। प्रस्तावित केंद्र मरीजों को वैज्ञानिक और समग्र उपचार उपलब्ध कराने के लिए एक प्रमुख केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के रूप में विकसित होगा।
यह नया केंद्र छात्रों को आधुनिक प्रशिक्षण के साथ बहुविषयक शिक्षा के बेहतरीन अवसर भी देगा। यहां साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे मरीजों को राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिल सकें। यह कदम स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की दृष्टि से बीएचयू के लिए एक अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।















