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सरकार व नीतियाँ
14 Jul, 2026

मोशी हादसे की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित

महाराष्ट्र सरकार ने पुणे के मोशी वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट हादसे की जांच के लिए छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो तकनीकी कारणों की पड़ताल कर जिम्मेदारी तय करेगी।

मुंबई, 14 जुलाई।

महाराष्ट्र सरकार ने पुणे जिले के मोशी स्थित बिल्डिंग हादसे की जांच के लिए पुणे मंडल आयुक्त शीतल तेली-उगाले की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति हादसे के कारणों की तकनीकी जांच करेगी और कचरे के ढेर के ढहने की वजहों का विस्तृत आकलन करेगी।

नगर विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार, 8 जुलाई को मोशी वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट में हुए हादसे की जांच के लिए यह हाई-लेवल टेक्निकल कमेटी बनाई गई है। इस दुर्घटना में नौ लोगों की मौत हुई थी। समिति हादसे के लिए जिम्मेदार कमियों की पहचान करेगी और संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों तथा एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश भी करेगी।

राज्य सरकार ने समिति को एक महीने के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और दो महीने के अंदर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अंतिम रिपोर्ट में जिम्मेदार व्यक्तियों की स्पष्ट पहचान करने के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुधारात्मक सुझाव भी देने होंगे। समिति में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नामित क्षेत्रीय अधिकारी, आईआईटी बॉम्बे के प्रो. डी.एन. सिंह, प्रो. अनिल कुमार दीक्षित तथा पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम के सहायक आयुक्त (आपदा प्रबंधन) सदस्य के रूप में शामिल हैं। सहायक आयुक्त सदस्य सचिव की जिम्मेदारी निभाएंगे।

समिति यह भी जांच करेगी कि सैनिटरी लैंडफिल में कचरे के ढेर की ऊंचाई, ढलान, स्थिरता और कचरा जमा करने की प्रक्रिया निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप थी या नहीं। साथ ही कचरे के ढेर के नीचे स्थित प्रशासनिक भवन की लोकेशन, संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा पहलुओं का भी मूल्यांकन किया जाएगा।

जांच के दौरान हादसे से पहले कचरे के ढेर के खिसकने, जमीन धंसने, भारी बारिश अथवा अन्य चेतावनी संकेतों से जुड़ी शिकायतों, ईमेल, व्हाट्सएप संदेशों, तस्वीरों और अन्य रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जाएगी। समिति यह भी परखेगी कि अधिकारियों, ठेकेदारों या संबंधित एजेंसियों ने इन चेतावनियों पर समय रहते कार्रवाई की थी या नहीं। यदि बचाव या सुधारात्मक उपायों की अनदेखी हुई होगी तो संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

जांच में ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016, केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण इंजीनियरिंग संगठन के दिशा-निर्देश, पर्यावरण स्वीकृति की शर्तें, मानक संचालन प्रक्रियाएं और अन्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन का भी परीक्षण किया जाएगा। शासनादेश के अनुसार समिति तकनीकी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं से व्यापक, निष्पक्ष और गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके लिए उसे अधिकारियों, ठेकेदारों, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स और विशेषज्ञों को बुलाने, उनके बयान दर्ज करने तथा फाइलों, अनुबंधों, तकनीकी स्वीकृतियों, सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन सर्वे रिपोर्ट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच करने का अधिकार दिया गया है।

यदि जांच में प्रशासनिक लापरवाही, तकनीकी खामियां, अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन, पर्यावरण नियमों के उल्लंघन या सुरक्षा संबंधी चूक सामने आती है, तो समिति जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश करेगी। इसके साथ ही लैंडफिल ढलान की स्थिरता, स्टॉर्म वॉटर प्रबंधन, जोखिम आकलन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और आपदा तैयारी को मजबूत बनाने के लिए तत्काल तथा दीर्घकालिक उपाय भी सुझाए जाएंगे।

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