ढाका, 13 जुलाई।
बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी इलाकों में जारी मूसलाधार बारिश ने बाढ़ और भूस्खलन का विकराल रूप ले लिया है। कुदरत के इस कहर में अब तक 51 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 10 लाख से अधिक आबादी इस त्रासदी से जूझ रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चट्टोग्राम, कॉक्स बाजार, बांदरबन, रंगामाटी, खगराछड़ी, मौलवीबाजार और हबीगंज जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। आपदा की चपेट में आने से 2 लाख 67 हजार से अधिक परिवार बेघर हुए हैं और 50 हजार लोगों को सुरक्षित शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।
सबसे अधिक भयावह स्थिति कॉक्स बाजार में है, जहां 28 लोग काल के गाल में समा गए हैं। इस क्षेत्र में बसे लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लाउडस्पीकर के जरिए चेतावनी दी और लोगों को ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट किया।
सरकार ने राहत कार्य में सेना और नौसेना को उतार दिया है। दुर्गम इलाकों तक नावों के जरिए भोजन, पानी और दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। हालांकि, बिजली और संचार सेवाएं ठप होने से बचाव कार्यों में बाधा आ रही है।
प्रभावित क्षेत्रों में भोजन का भारी संकट पैदा हो गया है। कई घरों में अभी भी पानी भरा हुआ है, जिससे लोगों के पास खाना बनाने के साधन खत्म हो गए हैं। मजबूरन लोग सूखे राशन और बिस्कुट खाकर गुजारा कर रहे हैं।
मौसम विभाग ने राहत की उम्मीद जताई है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। आने वाले दिनों में बारिश में कुछ कमी आने के आसार हैं, फिर भी देश के बड़े हिस्से में बादल छाए रहेंगे।















