भोपाल, 21 जुलाई।
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 और मध्य प्रदेश फायर एंड इमरजेंसी सर्विस बिल, 2026 पारित कर दिए गए। दोनों विधेयकों पर चर्चा के दौरान फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष और कांग्रेस के बीच तीखी बहस हुई। बाद में विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
राजमार्ग संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि बड़े निर्माण कार्यों और ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि जिन लोग सड़क सुविधाओं का उपयोग करेंगे, उनसे उपयोग के आधार पर शुल्क लिया जाएगा और उसी राशि का उपयोग सड़कों के निर्माण एवं रखरखाव में किया जाएगा।
राकेश सिंह ने कहा कि कई परियोजनाओं में निर्माण लागत टोल वसूली से भी पूरी नहीं हो पाती, इसलिए ऐसी सड़कों के लिए वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। साथ ही ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक परियोजना की समय-सीमा पहले से तय होगी और उसे अनावश्यक रूप से आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा।
फायर एंड इमरजेंसी सर्विस बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने प्रदेश में फायर स्टेशनों और फायर कर्मियों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर नए फायर स्टेशन स्थापित करने की मांग की।
इस पर नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नए कानून से जनहानि और धनहानि दोनों में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और औद्योगीकरण को देखते हुए फायर सेफ्टी व्यवस्था को आधुनिक बनाना आवश्यक था। उन्होंने बताया कि प्रदेश में आधुनिक तकनीक से लैस विशेष फायर सेफ्टी फोर्स का गठन किया जाएगा, जिसे नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा और तकनीकी अधिकारियों की अलग टीम भी बनाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन करने के बाद यह विधेयक तैयार किया गया है। प्रदेशभर की मैपिंग कर यह तय किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाने हैं। साथ ही आधुनिक फायर मशीनें और उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने में लगभग छह माह का समय लगेगा। इसके तहत प्रत्येक वर्ष थर्ड पार्टी निरीक्षण अनिवार्य होगा और पूरी व्यवस्था 24 घंटे सातों दिन संचालित होगी। मंत्रालय स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा। फायर सेफ्टी टीम आग की घटनाओं के साथ बाढ़ और अन्य आपदाओं में भी राहत एवं बचाव कार्य करेगी।
उन्होंने कहा कि फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और एनओसी जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी तथा सभी प्रक्रियाओं के लिए समय-सीमा निर्धारित रहेगी। यदि किसी भवन में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर फायर सेफ्टी अधिकारियों को मजिस्ट्रियल शक्तियां भी दी जाएंगी।
मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय भवन संहिता और भूमि विकास नियमों के प्रावधान भी इस कानून में शामिल किए गए हैं। अधिकारियों के खिलाफ शिकायत के लिए अपील मंच का प्रावधान रहेगा। फायर सेफ्टी व्यवस्था के संचालन के लिए शुल्क और राज्य सरकार के वार्षिक बजट से वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसी दौरान कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने दिल्ली के नीट पेपर लीक मामले को लेकर राहुल गांधी के प्रदर्शन का मुद्दा उठाया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह राज्य सरकार का विषय नहीं है। इसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
सदन में मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता, 2026 भी पारित की गई। श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि निर्धारित शर्तों के साथ दुकानें 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन खुली रह सकेंगी। उन्होंने बताया कि गिग वर्कर्स को भी श्रम संहिता में शामिल किया गया है। महिला सुरक्षा के लिए कार्यस्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और श्रम न्यायालय तब तक कार्य करेंगे, जब तक श्रम विभाग में ट्रिब्यूनल का गठन नहीं हो जाता।














