राजगढ़, 21 जुलाई।
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित वन स्टॉप सेंटर की पहल से दो परिवारों के लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक विवादों का समाधान हुआ है। लगातार काउंसलिंग और समझाइश के बाद दोनों परिवारों ने आपसी सहमति से फिर से साथ रहने का निर्णय लिया।
वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक रश्मि चौहान ने बताया कि पहले मामले में करीब पांच वर्षों से पति-पत्नी अलग रह रहे थे। कई चरणों में हुई काउंसलिंग के दौरान पति ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए परिवार के साथ दोबारा रहने की इच्छा जताई, जबकि पत्नी ने भी रिश्ते को एक और अवसर देने पर सहमति व्यक्त की। इसके बाद दोनों ने आपसी विश्वास और समझ के साथ नया जीवन शुरू करने का निर्णय लिया।
दूसरे मामले में दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से जुड़ी शिकायत पर परामर्शदाता कविता वर्मा ने दोनों पक्षों की अलग-अलग और संयुक्त काउंसलिंग की। दहेज प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी देने और लगातार संवाद के बाद ससुराल पक्ष ने अपने व्यवहार में सुधार का भरोसा देते हुए पीड़िता से क्षमा मांगी। इसके बाद दोनों पक्षों ने आपसी सम्मान और सौहार्द के साथ परिवार को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
प्रशासक रश्मि चौहान ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य केवल संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी, मनोसामाजिक और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि जहां संभव हो संवाद के माध्यम से पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करना भी है। उन्होंने बताया कि दोनों मामलों में नियमित फॉलोअप किया जा रहा है, ताकि परिवारों में आपसी विश्वास बना रहे और भविष्य में विवाद दोबारा न बढ़ें।















