भोपाल, 10 जुलाई।
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) में बीटेक चौथे सेमेस्टर के नौ सीलबंद प्रश्नपत्रों के लिफाफे चोरी होने के मामले की जांच अभी तक किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। घटना के कई दिन बाद भी पुलिस आरोपितों तक नहीं पहुंच पाई है, जबकि विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति भी पूरे मामले की पड़ताल में जुटी हुई है।
इसी बीच परीक्षा नियंत्रक डॉ. अर्चना तिवारी ने कुलगुरु प्रो. आलोक शर्मा को अपना लिखित स्पष्टीकरण सौंप दिया है। उन्होंने अपने जवाब में कहा है कि पिछले सात वर्षों से परीक्षा नियंत्रक के रूप में उन्होंने पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुसार परीक्षाओं का संचालन कराया है तथा उनके कार्यकाल में कभी भी प्रश्नपत्रों की गोपनीयता पर कोई सवाल नहीं उठा।
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जारी है। परीक्षा शाखा से जुड़े कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और सभी पहलुओं की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अर्चना तिवारी ने अपने स्पष्टीकरण में विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परीक्षा शाखा की सुरक्षा मजबूत करने के लिए उन्होंने पहले ही सीसीटीवी कैमरे लगाने का अनुरोध किया था, लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद प्रश्नपत्र चोरी की घटना को बेहद गंभीर बताया है।
उन्होंने मामले में विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई है। उनके अनुसार, कई विभागों का प्रभार उनके पास होने से कुछ कर्मचारी असंतुष्ट थे और उन्हें परीक्षा नियंत्रक के पद से हटाने के उद्देश्य से यह साजिश रची गई हो सकती है।
डॉ. तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के प्रभावशाली पदों पर बैठे कुछ लोगों का संरक्षण भी इस पूरे मामले में शामिल हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी सुरक्षा व्यवस्था और प्रक्रियागत स्तर पर गंभीर लापरवाही की ओर संकेत किया गया था। हालांकि पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।















