भोपाल, 10 जुलाई।
भोपाल नगर निगम प्रशासन ने कार्यों में लापरवाही और निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं करने वाले 150 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के जून माह के वेतन पर रोक लगा दी है। इस कार्रवाई की जद में इंजीनियर, जोनल अधिकारी, वार्ड प्रभारी सहित विभिन्न शाखाओं के कर्मचारी शामिल हैं। अब इनका वेतन नगर निगम आयुक्त की अनुमति के बाद ही जारी किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, निगम की विभिन्न शाखाओं में कार्यों की प्रगति संतोषजनक नहीं मिलने पर यह निर्णय लिया गया है। विशेष रूप से सीवेज और सिविल शाखा के विकास कार्यों की धीमी प्रगति के कारण संबंधित इंजीनियरों का वेतन रोका गया है। वहीं, विभिन्न जोनों में संपत्ति कर और अन्य मदों की राजस्व वसूली निर्धारित लक्ष्य से काफी कम रहने पर जोनल अधिकारियों और वार्ड प्रभारियों का वेतन भी जारी नहीं किया गया। अन्य शाखाओं के ऐसे कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है, जिनकी कार्यप्रणाली में लापरवाही पाई गई।
वेतन रुकने के बाद संबंधित अधिकारी और कर्मचारी वित्त विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि नगर निगम आयुक्त की अनुमति मिलने के बाद ही वेतन जारी करने पर निर्णय लिया जाएगा।
बताया गया है कि हाल ही में आयोजित समय-सीमा समीक्षा बैठक में नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने विकास कार्यों और राजस्व वसूली की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों का वेतन रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बाद संबंधित शाखाओं में यह कार्रवाई अमल में लाई गई। निगम के इस फैसले को जवाबदेही तय करने और कार्य संस्कृति में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
इधर, नगर निगम के अतिक्रमण अमले ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अभियान चलाकर नालियों पर किए गए अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाए। संत हिरदाराम नगर स्थित दीनदयाल कॉलेज और ईदगाह हिल्स क्षेत्र में नालियों पर बने अवैध चबूतरे हटाए गए। वहीं, कोलार चूना भट्टी, पुष्पा नगर और राहुल नगर रोज मैरी स्कूल क्षेत्र में नालियों पर रखी गई अवैध फर्शियां भी हटाई गईं।
इसके अलावा सेकेंड स्टॉप क्षेत्र में यातायात में बाधा बन रहे 10 चार पहिया वाहन और 10 लोडिंग ऑटो हटाए गए। शहर के अलग-अलग हिस्सों में फुटपाथों पर लगी सब्जी की दुकानें, दुकानों के बाहर रखा सामान, ठेले, गुमठियां और काउंटर भी हटाए गए।
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्धारित समय-सीमा में लक्ष्य पूरे करने की जिम्मेदारी दी गई है। जिनकी कार्यप्रगति संतोषजनक नहीं मिली, उनका वेतन रोका गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों और राजस्व वसूली में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारी लक्ष्य पूरे कर संतोषजनक प्रगति दिखाएंगे, उसके बाद ही वेतन जारी करने पर विचार किया जाएगा।















